माहे सफर इस्लामी कैलेंडर के लिहाज़ से वो महीना है जो अहले बैत के लिए ग़मो अंदोह का एक सैलाब लेकर आया | रसूले अकरम की शहादत को अभी बहुत वक्त नहीं गुज़रा था कि यज़ीद ने इस्लाम का पर्दा ओढ़ कर अपने मफआद् की ख़ातिर रसूल के नवासो को शहीद कर दिया और उनकी औरतों व बच्चों को क़ैदी बनाकर दरबदर फिराया l इसी माह में रसूले अकरमﷺ, इमाम हसन(अ.स.) और इमाम अली रजा(अ.स.) की शहादत हुई है| आप तीनों को ज़हर से शहीद किया गया और इसके साथ जनाबे सुग़रा और जनाबे सकीना की वफात भी हुई है|
इमाम हुसैन(अ.स.) और शोहदाये कर्बला का चेहलुम् सफर की 20 तारीख को ही होता है लिहाज़ा हमारा फर्ज़ यह है कि हम इस महीने में किसी भी खुशी के प्रोग्राम से दूर रहे और मजलिस मातम नौहा खवानी करके शहज़ादी ऐ कोनैन को पुरसा दे |
हम लोग बाख़ुदा वाक़िफ हैं कि जिस तरह इमाम हुसैन(अ.स.) की शहादत ने इस्लाम को नई जिंदगी दी इसी तरह हज़रत ज़ैनुल आबेदीन(अ.स.) और हज़रत ज़ैनब(अ.स.) ने कर्बला के वाक़ये की हक़ीक़त से सारी दुनिया को रू शनास कराया |
कर्बला से ये काफिला कूफा व शाम रवाना हुआ तो रास्ते मे, बाज़ारों में और इब्ने ज़्याद के दरबार मे हज़रत ज़ैनब(अ.स.) और हज़रत ज़ैनुल आबेदीन(अ.स.) ने बे शुमार खुतबे इरशाद फरमाए| आपने सारी दुनिया को ये बताया के कर्बला मे कोई और नही| मुसलमानो के रसूल के नवासे को यज़ीद ने निहायत बे रेहमी से शहीद किया है | और हम रसूल की नवासियों और छोटे छोटे बच्चो को बे ख़ता क़ैद किया है | ये सुनकर देखने वाले रोते थे | जब ये काफिला शाम पहुँचा तो हज़रत ज़ैनब(अ.स.) ने एक फसीह ओ बलीग् खुतबा यज़ीद के दरबार में दिया | आपने निहायत बे खौफ़ और निडर होकर बाद हम्द ओ सना व दरूद और सलाम के फरमाया यज़ीद क्या तू ये समझता है तूने हमें क़ैद करके अल्लाह की नज़रो में हमारा मक़ाम कम कर दिया है और तू बहुत बड़ा इज्जत दार बन गया है | यह तेरी खाम ख्याली है | तू गुरूर के समुंदर में डूब गया है | तू उस दिन से डर जब रोज़ ए मेहशर् तुझ से पूछा जाएगा कि बे ख़ता और बेक़सूर रसूल के नवासे हुसैन को तूने क्यों क़तल किया | तूने क्यों हम अली की बेटियों को सताया | बस दो चार सांसे और ले ले क्या तू खुदा के उस फरमान को भूल गया है कि ज़ुल्म की राह इख़्तियार करने वाले यह गुमान ना करें कि हम जो उनको मोहलत दे रहे हैं वह उनके लिए बेहतरी है , हम उनको मोहलत इसलिए दे रहे हैं कि वह और ज़्यादा गुनाह समेट लें क्यूँ की ऐसे ही लोगों के लिए सख़्त ज़िल्लत देने वाला अज़ाब है| यह ज़माने की गर्दिश है कि मैं अली की बेटी तुझ जैसे ज़लील इंसान से मुख़ातिब हूँ |
वह वक़्त आने वाला है कि तू रसूल का सामना करेगा और ज़लील ओ खुआर होगा | हजरत ज़ैनब(अ.स.) का इस तरह का कलाम सुनकर तमाम दरबारी और सफीर जो दरबार में मौजूद थे हैरत ज़दा रह गए, वह तो यह समझ रहे थे यह क़ैदी यज़ीद से मिन्नत और समाजत करके अपनी रिहाई की दुहाई देंगे| मगर जिस लहजे में हज़रत ज़ैनब(अ.स.) ने यज़ीद को मुखातिब किया और उसे बताया कि तू क़यामत के रोज़ सख्त तरीन आब में मुबतला होगा तो वह सब लोग यह सोचने लगे यह क़ैदी कोई मामूली लोग नहीं है | हज़रत ज़ैनब(अ.स.) ने अपने ख़ुत्बे में जब अपना और हज़रत ज़ैनुल आबेदीन(अ.स.) का तार्रूफ कराया तो सारे हाज़रीन हैरत में थे कि मुसलमानो ने ही अपने रसूल के नवासे को शहीद कर दिया|
इसी तरह के ख़ुतबात से यज़ीद को अपनी हुकूमत ख़तरे मे नज़र आई तो उसने अहले बैत को क़ैद मे डाल दिया और खुद क़यामत तक के लिए लानत का हक़दार हो गया ।
दुआ गो —
खामिसा हैदर नक़वी
( नोएडा एक्सप्रेसवे )
(For the month of Safar)