रबी अल अव्वल इस्लामिक कैलेंडर का तीसरा महीना है। “रबी” के मानी अरबी में होता है “बहार” अल अव्वल के मानी अरबी में होता है “पहला”। इस तरह रबी अल अव्वल के मानी अरबी में हुआ “पहली बहार” ये बहुत अज़ीम और मोतबर्रक महीना है। दीन ए इस्लाम की बुनियाद का महीना है इसलिए बानिए इस्लाम सरकार अंबिया की आमद का महीना है। अव्वल मोहम्मद की आमद है जो बानिए इस्लाम है तो दीन ए इस्लाम के आख़री मोहम्मद की शुरु दौरे हुकूमत का महीना है।
8 रबी अल अव्वल …… इसकी इब्तेदा में दीन ए इस्लाम के ख़ानदाने रिसालत के 11वां ईमाम, हज़रत हसन अल असकरी(अ.स) दुनिया से रुख़सत हुऐ। हमारा आख़री इमाम यतीम हो गया।
9 रबी अल अव्वल …… आज के दिन दो खुशियाँ हैं। आज का दिन एहलेबैत की खुशियों का दिन है। एहलेबैत की ज़िंदगी में खुशियाँ कम ग़म ज़्यादा होते थे बहोत दुखों और ग़मों के बाद ये पहला दिन था जब एहलेबैत ने ग़म के बाद खुशी ज़ाहिर की थी, रीवायत में है क़ातिल ए इमाम हुसैन का सर लेकर आने वाले जनाबे मुख़तार सक़फी ने इबने ज़ियाद और चंद मलऊनों के सर काट कर इमाम सज्जाद (अ.स) को भेजे, हमारे इमाम ने मुख़्तार को मुबारकबाद दी थी। इसीलिए हम उनकी इस खुशी में आज के दिन को ईद ए ज़हरा / ईद ए शुजा के नाम से मनाते हैं।
9 रबी अल अव्वल …… मुसलमान ईद तो कई मानते हैं मगर दो ईद ऐसी है जिसको कोई भी मुनाफिक नहीं मनाएगा सिर्फ एहलेबैत अतहार के मानने वाले ही मनाते हैं। एक ईद ए ग़दीर और दूसरी ईद ए शुजा। 9 रबी अल अव्वल को इमाम आख़िर की ताजपोशी की खुशी का भी दिन है। मैदान ग़दीर में जो ईद हुई वो विलायत के बुनियाद की ईद थी और 9 रबी अल अव्वल की ईद खतमे विलायत का दिन है। यानी हमारे इमाम आख़रुज्ज़मां को आज के दिन ही हमारा आख़री हादी ओ रहबर बनाया गया,जो पर्दा-ए-ग़ैब में मौजूद है,एक दिन हुक्म ए ख़ुदा से ज़ाहिर होगा। इंशा अल्लाह ।
आपके अहदे हुकूमत में मुकम्मल अमन व सुकून होगा। तमाम लोग पाकबाज़ होंगे। दीन के मुरदा दिल में ताज़ा रूह पैदा हो जायेगी। दुनिया के तमाम मज़हब ख़त्म हो जायेंगे। सिर्फ ख़ुदा का बताया हुआ मज़हब होगा और उसी का डंका बजता होगा। दुनिया के तमाम मज़लूम बुलाये जायेंगे और उनपर ज़ुल्म करने वाले हाज़िर किये जायेंगे। इमाम हुसैन(अ.स) के ख़ून का मुकम्मल बदला लिया जायेगा और इस तरह इमाम मेहदी(अ.स) ‘दम तोड़ चुकने वाली किताब व सुन्नत को फिर से जिंदा कर देंगे।
” غدیر و کربلا کا بابِ حیات آجا ──── کوثر پکارتا ہے آبِ حیات آ جا
سر اُڑتے نظر آئینگے نسل یزید کے ──── آ جائے ذرا غیب سے بیٹا حسین کا ”
17 राबिल अव्वल…… इस रोज़ बानिए इस्लाम हज़रत मुहम्मद(ﷺ) की विलादत का दिन है । आपकी विलादात मक्का मुआज्ज़मा में हुई। रसूले खुदा (ﷺ) की विलादत ब रोज़ जुमा सुबह सादिक़ के नज़दीक हुई, जिस साल असहाबे फिल हाथी लेकर ख़ाने काबा को ढाने आए थे।12 से 17 रबी अल अव्वल के दौरान मुसलमानों के दरमियान इज़हार ए वहदत की ख़ातिर हफ्ता ए वहदत मनाया जाता है।
हज़रत मुहम्मद(ﷺ) ने बचपन के अय्याम यतीमी में गुज़ारे हैं। आपके दादा जनाबे अब्दुल मुत्तलिब ने आपकी परवरिश की, उनके बाद चचा हज़रते अबू तालिब की सर परस्ती हासिल हुई। कुछ रिवायत में है के इसी महीने रसूलल्लाह(ﷺ) ने हिजरत भी की। जब कुफ्फार ओ मुश्रेकीन का ज़ुल्म ओ सितम ना क़ाबिले बर्दाश्त हो गया, हुक्म अल्लाह तबरको ताला ने अपना फरमान भेजा (सुरह बनी इसराइल :81तर्जुमा) उसके मुताबिक हक़ ओ बातिल के लिए हिजरत का हुक्म फरमाया। हमारे रसूल ने बड़ी बेकसी के हालात मे मक्के से मदीना मुनाववारा हिजरत किया। हिजरत ए रसूल तारीख़ ए इस्लाम का बल्के आलम ए इस्लाम का इंतहाई अहम तरीन गोशा है। तारीख़ हक़ ओ बातिल का रौशन बाब है। हिजरत के बाद हमारा दीन ए इस्लाम खूब फैला।
सरदार ए अंबिया मोहम्मद ए मुस्तफा(ﷺ) को अल्लाह ने हमारी हिदायत के लिए भेजा, क़ुरान ए मजीद की वही के ज़रिए दीन ए इस्लाम को हमारे रसूल ने फैलाया। अल्लाह के बुलाने पर उन्हें मेराज अता हुई।
17 रबी अल अव्वल …… इस दिन एक और अज़ीम खुशी का दिन है। आज के दिन हमारे छठे इमाम जाफर ए सादिक़(अ.स) की भी विलादत बा साआदत का रोज़ है। सन 148 में आपकी विलादत हुई। आपके वालिद पांचवें इमाम मोहम्मद बाकर इब्ने अली (अ.स) थे। वालिदा उम्मेे फरवा थीं। ज़ौजा का नाम फातेमा था। आपकी कई औलादें थीं। आपकी मुद्दत ए हयात 65 साल थी। इमाम की इख़लाकी खुसूसियात में ज़हद, इन्फाक, फ्रावानिये इल्म, तूलानी इबादत और क़ुरान करीम की तिलावत वगैरह जैसी इखलाकी खुसूसियात का तज़कीराह मिलता है। आप ने बहुत सी किताबें लिखी गई। आपकी 800 किताबों का नाम लिया गया है जो शाया हो चुकी हैं।
18 राबिल अव्वल …… जनाबे उम्म कुलसुम बिनते अली की विलादत हुई। आप इमाम हुसैन की छोटी बहन थीं।जो मदीना से अपने भाई के साथ कर्बला आईं थीं।जिन्हों ने बाद शहादत इमाम हुसैन के दुश्मनों की क़ैद में अरसा गुज़ारा। रिहाई के बाद मदीना वापस आई और दमिश्क में उनका इंतकाल हुआ, बाब सगीर में आपकी क़ब्र मोत्ताहर है।
तालीबे दुआ…
क़मर बानो
( नोएडा एक्सप्रेसवे )
(For the month of Rabi’al Awwal)