माहे जमादि उल अव्वल

क़मरी कलेंडर का ये पाँचवा महीना है।

क्योंकी इस्लामिक कैलेंडर ज़मीन के गिर्द चाँद की गर्दिश पर मुनहसिर है इस लिए हर महीना अलग अलग मौसम मे आता है। यानी जिस तरह शमसी साल मे हर महीना उस ही मौसम मे आता है क़मरी साल मे ऐसा नही है। जब क़मरी साल के नाम रखे जा रहे थे तब पाँचवे महीने मे बहुत सर्दी पड़ रही थी के पानी जम जाता था। इस ही मुनाज़बत से इस महीने को जुमादा उल अव्वल या जमादिल अव्वल कहा जाने लगा। क्योंकी जम जाने को जुमादा कहा जाता है।

ये महीना भी बहुत बरकत का महीना है। कुछ उलेमा का कहना है के इस महीने की १५ तारीख विलादत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ) है ।

ऐसे ही बीबी फ़ातेमा ज़हरा की भी शहादत के बारे मे है।  कुछ लोग कहते है के  रसुले खुदा ( स०) की शहादत के ७० दिन बाद बीबी की वफ़ात हुई है और कुछ का कहना है के बीबी की वफ़ात रसूल अकरम के ९० दिन बाद हुई है तो बा रिवायत ओलामा इस महीने मे भी बीबी फ़ातेमा की शहादत मानी  जाती है और अशराऐ मजालिस का इनइक़ाद किया जाता है।

इस महीने की ३ तारीख को हज़रत अमिरल मोमीनीन अलेहिस सलाम ने बसरा फतह किया था। मोमिन को चाहिए इस रोज़ रोज़ा रखे। और इमाम कि ज़ियारत पढे़।

 

दुआओं मे याद रखें …

खामिसा हैदर नक़वी
( नोएडा एक्सप्रेसवे )

(For the month of Jamadi’ul Awwal)