” माहे रजब “

क़मरी कलैंडर के हिसाब से ये सातवां महीना है। इस महीने की फज़ीलत और महीनों से बहुत अफज़ल है। ये महीना ख़ुदा ने अपने नाम से मनसूब किया है। इस महीने मे परवरदिगारे आलम ने सदक़े का बहुत हुक्म दिया है और अस्तग्फार करें। इस महीने मे चार इमामो की विलादत है- हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स), हज़रत इमाम अली नक़ी (अ.स), हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी(अ.स) और इमाम अमिरल मोमीनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब(अ.स) है |

13 रजब हमारे पहले इमाम हज़रत अली(अ.स) की विलादत का दिन है | ये वो दिन है जो अर्श और फर्श पे बहुत शान से मनाया जाता है | जिनकी विलादत मलायेका भी मनाते है| अल्लाह जिनकी विलादत के लिए अपने घर काबे की दीवार शक करके बीबी फ़ातेमा बिन्ते असद को अंदर बुलाते है, तब होता है ज़हूर मेरे पहले इमाम हज़रत अली(अ.स) का | रसूले ख़ुदा मक्का से बाहर गए हुए थे,तीन दिन बाद जब रसूले ख़ुदा ने काबे के दरवाजे का ताला खोला तो एक खूबसूरत बच्चे को देखा | उस बच्चे को रसूले ख़ुदा ने उनकी मां की आग़ोश से अपनी आग़ोश मे लिया | रसूल ने बच्चे की पेशानी पर बोसा दिया | बच्चे ने आँखे खोली, जमाले रिसालत पर नज़र डाली, सलाम किया | रसूल ने बच्चे की मुह मे अपनी ज़ुबान दी| अली ने ज़ुबान चुसी, अली की ज़ुबान गोया हुई |

अली के मुह मे नबी नें ज़ुबाँ दी हैरत किया,  नबी हर एक हक़ीक़त को जान लेता है

ज़ुबान हर कसो नाकस को दी नही जाती,  रसूल सोच समझ कर ज़ुबान देता है

फ़िर अली ने कहा- या रसूलअल्लाह क्या सुनाऊ तौरैत सुनाऊ , इंजील सुनाऊ, ज़ूबूर सुनाऊ, कुरान सुनाऊ| वाह वाह कुरान सुनाया जबकि क़ुरान अभी नाज़िल भी नही हुआ है | ये पहला मोजिज़ा है मोजिज़ नुमा अली ए मुर्तज़ा का |13 रजब को काएनात की हर वो शै खुशियाँ मनाती है जो अली की मोहब्बत से सर शार है|

रजब मे कुछ ईमामो की शहादत भी है – हज़रत इमाम जाफर ए सादिक(अ.स), हज़रत इमाम मूसा काज़िम(अ.स) और नन्ने मुजाहिद हज़रत अली असगर की विलादत भी इस ही महीने की 9 तारीख को है। माहे रजब की पहली, पंदरह, और आख़िरी तारीख की शब को ईबादत मे बसर करें। 24 तारीख फतेह खैबर है। जंगे ख़ैबर इस्लामिक तारीख की बहुत बड़ी जंग है। ख़ैबर नाम का क़िला यहूदियों का बहुत मज़बूत क़िला था | ये एक पहाड़ पर बना है जिसकी वजह से इसका फतह करना बहुत मुश्किल था |  मुसलमानो ने इसको काफी दिन फतह करने की कोशिश की मगर ना कामीयाब रहे | तब रसूले खुदा ने ये एलान किया और तारीखी जुमला कहा- “कल ये अलम उसको दूंगा जो कररार होगा गैरे फररार होगा “ | रसूले खुदा सo ने ये जिम्मेदारी हज़रत अली (अ.स) को सौपी और हज़रत अली ने मरहब को और कई पहलवानो को क़तल किया और  कामियाब हुए  |

जंगे ख़ैबर मे आपने मौला   –   रुख कुछ इस तरह से मोड़ दिया

फँसाया उंगलियो मे ख़ैबर को   –   और झूला झुला के छोड दिया

27 तारीख को रिसलालत माआब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम माबूस ब रिसालत हुए। इसको बेसत कहते हैं। बेसत का मतलब ये है के रसूले ख़ुदा सo ज़ाहरी तौर पर नबूवत के ओहदे पर फाइज़ हुए| 27 रजब शबे मेराज भी है | मेराज वो रात हैं  जब अल्लाह ने अपने महबूब, ख़ुदा को अर्श पर बुलाया | वहा बराये रास्त ख़ुदा ओ रसूल मे कुछ गुफतगू  हूई | इमाम का क़ौल है के ज़मीन हुज्जते ख़ुदा से अगर एक लम्हा भी खाली रहेगी तो तहस नहस हो जायेगी | तो अल्लाह ने ये इंतज़ाम किया के कायेनात को मुकम्मल तौर पर  रोक दिया | इसलिए शायर ने कहा – 

ज़ंजीर भी हिलती रही बिस्तर भी रहा गर्म  –  एक पल मे गए और चले आये मोहम्मद 

28 रजब एक ग़म की तारीख़ है | इस दिन इमाम हुसैन ने अपने अज़ीज़ ओ अकरबा, दोस्त, ओ अहबाब के साथ मदीने से वो सफर शुरू किया जिसका  इखताताम इंसानियत की एक अज़ीम कुर्बानी की शकल मे हुआ | रसूले ख़ुदा की शाहादत के बाद मज़हबी रहनुमाओ ने अपने मफाद की खातिर  शरीयत मे तब्दीलिया शुरू करदी और अहले बैत पर मज़ालिम ढाना शुरू कर दिये | पर मुसलमान इतना गफ़िल हो चुका था के उसे ये एहसास ख़तम हो गया था नाम निहाद रहनुमा दीन को किधर ले जा रहे हैं | मुसलमान एहले बैत पर ज़ुल्म के खिलाफ़ एहताजाज  नही कर रहा था | ऐसे वक़्त मे इमाम हुसैन (अ.स) ने ये एलान किया कि उम्मत को इस्लाह की ज़रूरत है और मैं अम्र बिल मारूफ वा नहि अनिल मुंकर के ज़रिए नाना की उम्मत की इस्लाह करूंगा | इस मक़्सद के साथ एक छोटे से काफले की शकल मे  जिसमे ख्वातीन और बच्चे भी थे, 28 रजब को अपनी प्यारी बेटी सुगरा जो के अलील थी उनको मदीने मे छोड़ा और सफर इख़्तियार किया| और इमाम हुसैन(अ.स) ने ये भी एलान किया के मैने ये सफर किसी भी तरह का फसाद फैलाने या किसी पर ज़ुल्म करने के लिए  इख़्तियार नही किया है| इस तरह हक़ की तबलीग करते करते 2 मोहर्रंम को इमाम हुसैन कर्बला पहुंचें।

फरज़नदे पयम्बर का मदीने से सफर है सादात की बस्ती के उजडने की खबर है” 

हीना बहुत बरकत का महीना है इसमे जितनी इबादत करेंगे उसके एवज़ मे अल्लाह सबके गुनाह माफ़ करेगा |

दुआओं मे याद रखें ….

खामिसा हैदर नक़वी  ( नोएडा एक्सप्रेसवे )