माहे रबिउल आखिर

इस्लामिक क्लैंडर के हिसाब से ये साल का चौथा महीना है। इस महीने की  १० तारीख हमारे  तेरहवें मासूमीन और ग्यारवे इमाम, इमाम हसन अस्करी(अ. स) की विलादत है। जो बहुत मुबारक दिन है। मोमिन को चाहिए के इस दिन रोज़ा रखें। सदक़ा दें।

इमाम हसन अस्करी (अ.स) की कुन्नियत अबू मोहम्मद थी। आपके अलक़ाब बे शुमार है । जिसमे अस्करी, हादी, ज़की, सिराज और इब्ने रज़ा ज़्यादा मशहूर है। आप जब चार माह के थे तभी आपके वालिद इमाम अली नक़ी (अ.स) ने  आपके लिए मंसबे इमामत की वासियत की । और फरमाया के उनके बाद ये ही मेरे जानशीन हैं।

आपके बहुत मोजिज़ात है। आपके इल्म की कोई इंतेहा न थी, आप  का कहना है के हमको साहिबे क़्लम क़रार दिया गया है। उलमा का कहना है के आप जब लिखते लिखते नमाज़ के लिए चले जाते थे तो कलम अपने आप लिखता रहता था। बा हुक्मे खुदा जो आप चाहते थे कलम वो लिखता रहता था।

इमाम का इरशाद है। के हमारे मज़हब  मे उन लोगों का शुमार होगा जो इन 10 चीज़ो का क़ायल ओ आमिल हो –

  1. शबो रोज़ मे 51 रकत नमाज़ पढे
  2. ख़ाके करबला पे सजदा करे
  3. दाहिने हाथ मे अंगूठी पेहने
  4. अज़ान, अक़ामत के जुमले दो दो बार कहे
  5. अज़ान मे हय्या ला खैरिल अमल कहना
  6. नमाज़ मे बिस्मिल्लाह ज़ोर से पढ़े
  7. दूसरी रकत मे क़नूत पढ़ना
  8. तारो के डूबने से पहले सुबह की नमाज़ पढ़ना
  9. सर और दाढ़ी मे खिज़ाब करना
  10. नामाज़े मय्यत मे 5 तकबीर कहना

दुआ गो…

खामिसा हैदर नक़वी
( नोएडा एक्सप्रेसवे )

(For the month of Rabi’ul Akhir)